जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में अंतिम दस्तावेज पर सहमति नहीं, पीयूष गोयल बोले- मतभेदों के बावजूद बातचीत सार्थक

नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि कुछ देशों के बीच मतभेदों के कारण मिल्वौकी में हुई जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में किसी अंतिम आउटकम डॉक्यूमेंट पर सहमति नहीं बन सकी। हालांकि, उन्होंने बैठक में हुई बातचीत को सार्थक बताया और कहा कि वैश्विक व्यापार से जुड़े कई अहम मुद्दों पर देशों के बीच चर्चा हुई। बैठक में जबरन मजदूरी, विश्व व्यापार संगठन (WTO) का भविष्य और अत्यधिक उत्पादन क्षमता जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
शिकागो में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के एक कार्यक्रम में गोयल ने कहा कि जी20 बैठक में बातचीत का दौर काफी फायदेमंद रहा, लेकिन कुछ देशों के साथ मतभेदों के चलते कोई अंतिम नतीजा देने वाला दस्तावेज तैयार नहीं हो सका। उन्होंने संबंधित देशों के नाम या उन मुद्दों का स्पष्ट विवरण नहीं दिया, जिन पर अंतिम दस्तावेज के लिए सहमति नहीं बन पाई।

गोयल ने बताया कि मंत्रियों के बीच वैश्विक सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी से बने सामान के व्यापार पर भी चर्चा हुई। भारत ने ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए स्पष्ट और सत्यापन योग्य सबूतों पर जोर दिया है। गोयल ने कहा कि व्यापारिक प्रतिबंध पूरे देशों, क्षेत्रों या क्षेत्रों की व्यापक धारणाओं के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस साक्ष्यों के आधार पर होने चाहिए और WTO नियमों के अनुरूप होने चाहिए।

बैठक में विश्व व्यापार संगठन के भविष्य पर भी विचार-विमर्श हुआ। गोयल ने WTO को भारी दबाव में बताया और बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था में नियम-आधारित दृष्टिकोण को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत WTO के केंद्र में रहते हुए खुले, समावेशी, पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण बहुपक्षीय व्यापार तंत्र की वकालत करता रहा है।
बैठक में सरकारी सहायता से विकसित अत्यधिक उत्पादन क्षमता और उसके वैश्विक व्यापार पर असर का मुद्दा भी उठा। गोयल ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था घरेलू मांग पर आधारित है और भारत की विनिर्माण क्षमता घरेलू तथा वैश्विक दोनों जरूरतों को पूरा करती है। उन्होंने व्यापार में विकृतियों को दूर करने के लिए WTO के अनुरूप उपायों की जरूरत पर जोर दिया।

गोयल ने जी20 बैठक में मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (MFN) सिद्धांत से जुड़े मुद्दे पर भी भारत का रुख रखा। भारत का कहना है कि MFN का लाभ WTO सदस्यों के बीच गैर-भेदभावपूर्ण व्यापार व्यवस्था का आधार है और इसे कुछ चुनिंदा सदस्यों की अलग-अलग प्रतिबद्धताओं से सशर्त नहीं बनाया जाना चाहिए।
जहां कई व्यापारिक मुद्दों पर व्यापक सहमति नहीं बन सकी, वहीं जी20 व्यापार मंत्रियों ने खाद्य व्यापार को दबाव या भू-राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के खिलाफ एक अलग बयान पर सहमति जताई। भारत ने खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देने और भोजन को किसी देश पर दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं करने की बात कही।

मिल्वौकी बैठक के बाद गोयल शिकागो पहुंचे, जहां उन्होंने अमेरिकी कारोबारियों, निवेशकों और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। उन्होंने विभिन्न आकार के कारोबारों और बड़े निवेशकों के साथ बैठकें कीं तथा भारतीय-अमेरिकी कारोबारियों को भारत में निवेश बढ़ाने और देश के आर्थिक विस्तार में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।
मियामी में होने वाले जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन के बारे में पूछे जाने पर गोयल ने कहा कि इस संबंध में फैसला दोनों नेताओं को करना है। अमेरिका वर्ष 2026 में जी20 की अध्यक्षता कर रहा है और मिल्वौकी की व्यापार मंत्रियों की बैठक नेताओं के शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल थी।