गांव में तेंदुए का खौफ, 3 साल की बच्ची पर हमला, ग्रामीणों ने बचाई जान

गरियाबंद। गरियाबंद जिले के कोटरीछापर गांव में एक बार फिर जंगली जानवरों का आतंक देखने को मिला है। यहां घर के आंगन के बाहर खेल रही 3 साल की मासूम बच्ची पर तेंदुए ने अचानक हमला कर दिया। इस भयावह घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई है। हालांकि ग्रामीणों और बच्ची की मां की तत्परता से एक बड़ी अनहोनी टल गई।
स्थानीय जानकारी के अनुसार, मासूम बच्ची अपने घर के बाहर आंगन में खेल रही थी। इसी दौरान घात लगाए बैठे तेंदुए ने अचानक झपट्टा मार दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तेंदुआ इतनी तेजी से आया कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला और उसने बच्ची को पकड़कर खींचने की कोशिश की। लेकिन जैसे ही बच्ची की मां ने यह दृश्य देखा, उसने जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया। आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके की ओर दौड़े।
ग्रामीणों ने बिना अपनी सुरक्षा की परवाह किए तेंदुए का सामना किया। शोर-शराबे और भीड़ को देखकर तेंदुआ कुछ देर के लिए विचलित हो गया। इसी मौके का फायदा उठाकर लोगों ने मिलकर मासूम बच्ची को उसके चंगुल से छुड़ा लिया। हालांकि इस हमले में बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। उसके गर्दन और पैर में कई जगह चोटें आई हैं। परिजनों ने तुरंत उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम गांव में पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। विभाग ने इलाके में गश्त बढ़ाने और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। वन विभाग की ओर से पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता राशि भी प्रदान की गई है, हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह मदद नाकाफी है क्योंकि क्षेत्र में लगातार जंगली जानवरों की आवाजाही बढ़ रही है।
यह पहली घटना नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, लगभग दो महीने पहले भी इसी इलाके में तेंदुए ने एक बुजुर्ग पर हमला किया था। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोग अब बच्चों को अकेले घर के बाहर खेलने से भी रोकने लगे हैं।
ग्रामीणों की मांग– स्थायी समाधान जरूरी
गांव के लोगों का कहना है कि वन विभाग को केवल सतर्कता या अस्थायी उपायों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि तेंदुए को पकड़ने या सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि गांव के आसपास निगरानी बढ़ाई जाए, कैमरा ट्रैप लगाए जाएं और रात के समय विशेष गश्त की व्यवस्था की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।