रायपुर, 06 जून 2026 आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर दुर्ग जिले के ग्राम नागपुरा के किसान भगत राम साहू ने यह साबित कर दिया है कि वैज्ञानिक खेती से कम लागत में भी बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त की जा सकती है। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसी अत्याधुनिक तरल उर्वरकों के उपयोग ने उनकी खेती की तस्वीर ही बदल दी है।
भगत राम बताते हैं कि पहले वे पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर थे। खेतों तक भारी-भरकम खाद की बोरियां पहुंचाना, उनका भंडारण करना और फिर खेतों में उपयोग करना न केवल श्रमसाध्य था, बल्कि इसमें समय और धन दोनों की अधिक खपत होती थी। कृषि विभाग के अधिकारियों की सलाह पर उन्होंने नैनो उर्वरकों का उपयोग शुरू किया। शुरुआत में छोटी शीशियों में मिलने वाली इस खाद को लेकर उन्हें संदेह था, लेकिन परिणाम उम्मीद से कहीं बेहतर निकले।
नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के छिड़काव के बाद उनकी धान की फसल अधिक हरी-भरी, मजबूत और रोग प्रतिरोधी दिखाई देने लगी। पौधों की वृद्धि में सुधार हुआ और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इतना ही नहीं, उन्होंने टमाटर, लौकी और अन्य सब्जी फसलों में भी नैनो उर्वरकों का सफल उपयोग किया, जिससे फसलों की गुणवत्ता बेहतर हुई और बाजार में अच्छे दाम प्राप्त हुए।
भगत राम के अनुसार नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये सीधे पत्तियों के माध्यम से पौधों को पोषण उपलब्ध कराते हैं। इससे उर्वरक की बर्बादी कम होती है और पौधों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से मिलते हैं। इसके साथ ही परिवहन, भंडारण और श्रम पर होने वाला खर्च भी काफी घट गया है।
कम लागत में अधिक उत्पादन मिलने से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और आर्थिक स्थिति पहले से अधिक मजबूत हुई है। अब वे अपने अनुभव साझा करते हुए आसपास के किसानों को भी नैनो तकनीक आधारित खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।