400 सुरक्षा कैंप बनेगे सेवा केंद्र, हर आदिवासी परिवार तक पहुंचेगी सरकारी सुविधा- केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

जगदलपुर। बस्तर से नक्सलवाद के पूरी तरह खात्मे के बाद पहली बार यहां पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर में शांति स्थापना का श्रेय जवानों के पराक्रम, आदिवासियों के अटूट विश्वास और मां दंतेश्वरी के आशीर्वाद को दिया। उन्होंने कहा कि डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और कोबरा के जवानों ने जिस अद्भुत साहस के साथ कठिन परिस्थितियों में अभियान चलाया, उसी का परिणाम है कि आज बस्तर हिंसा के दौर से उबरकर विकास की एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री ने अपने दो दिवसीय बस्तर दौरे की शुरुआत बस्तर के महान आदिवासी जननायक वीर शहीद गुंडाधुर की जन्मस्थली नेतानार से की। यहां उन्होंने शहीद गुंडाधुर को नमन करने के बाद सीआरपीएफ कैंप में ‘सेवा डेरा’ का शुभारंभ किया। दौरे का सबसे संवेदनशील और भावुक क्षण आसना स्थित बादल परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान देखने को मिला।
यहां गृहमंत्री शाह ने नक्सल पीड़ितों और जवानों से सीधा संवाद किया। कर्रेगुट्टा के अभियानों को याद करते हुए शाह ने कहा कि हमारे जांबाज जवानों ने 45 डिग्री के भीषण तापमान में भी लगातार आपरेशनों को अंजाम दिया और नक्सलियों को पहाड़ों से नीचे उतरने पर मजबूर कर दिया। इसी रणनीति के कारण बड़े पैमाने पर नक्सलियों के सरेंडर और एनकाउंटर का दौर शुरू हुआ। इस बार गृहमंत्री के बस्तर दौरे का मिजाज बदला हुआ था। इससे पहले वे जब भी बस्तर आते थे, तो उनके संबोधन के केंद्र में नक्सलवाद के खात्मे का संकल्प होता था, लेकिन इस बार उन्होंने बस्तरवासियों को विकसित बस्तर का संकल्प दिलाया। उन्होंने भरोसा दिया कि नक्सलियों ने पिछले 50 वर्षों में बस्तर को जो भी नुकसान पहुँचाया है, उसकी भरपाई सरकार अगले 5 साल में करेगी और बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाया जाएगा।
हर आदिवासी परिवार को मुख्यधारा से जोडेंगे
सेवा डेरा का यह अभिनव मॉडल अब बस्तर संभाग के सभी 400 सुरक्षा बल कैंपों में लागू किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य हर आदिवासी परिवार को मुख्यधारा से जोड़ना, विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाना और उन तक सरकारी सेवाओं को सीधे पहुंचाना है। नेतानार में गृहमंत्री ने स्थानीय स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से मुलाकात की, उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की सराहना की और बस्तर की प्रसिद्ध इमली का स्वाद भी चखा। इसके बाद वे जगदलपुर स्थित अमर वाटिका पहुंचे, जहां उन्होंने नक्सल हिंसा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सीएम ने कहा-बस्तर उद्योगपतियों को नहीं सौंपेंगे
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विपक्ष (कांग्रेस) पर कड़ा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद खत्म होने के बाद विपक्ष द्वारा यह झूठा नरेटिव और भ्रम फैलाया जा रहा है कि अब बस्तर को उद्योगपतियों को सौंप दिया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बस्तर के आदिवासी, किसान और यहां के गांव हैं। बस्तर में पारंपरिक खेती-किसानी को मजबूत करने के लिए 2,000 करोड़ की वृहद सिंचाई परियोजना की शुरुआत की जा रही है। उन्होंने गृहमंत्री की ओर से समस्त बस्तरवासियों को आश्वस्त किया कि यहां अब केवल स्थानीय नागरिकों के कल्याण और विकास को ही गति दी जाएगी।
डिप्टी सीएम ने रखी दो साल की रणनीति की रिपोर्ट
प्रदेश के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर में चलाए गए अभियानों की रणनीतिक सफलता का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में बेहद आधुनिक तकनीकों और सुनियोजित उपायों के साथ बस्तर के सुदूर अंचलों में ऑपरेशन चलाए गए। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी से ही मार्च 2026 तक बस्तर से नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे का ऐतिहासिक लक्ष्य हासिल किया जा सका है। अब बस्तर भय और हिंसा से मुक्त होकर देश में विकास का एक नया मॉडल बनेगा।
रायपुर में शाह ने डायल 112 व फॉरेंसिक मोबाइल वैन को दिखाई हरी झंडी
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रायपुर में एआई आधारित अत्याधुनिक डायल 112 आपातकालीन सेवा और 32 आधुनिक फॉरेंसिक मोबाइल वैन के बेड़े को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस विस्तार के बाद डायल 112 सेवा राज्य के 16 जिलों से बढ़कर अब सभी 33 जिलों में उपलब्ध होगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह भी उपस्थित थे। इस नई व्यवस्था के तहत 400 नए आपातकालीन वाहन, 33 विशेष निगरानी वाहन और 60 राजमार्ग गश्ती वाहन बेड़े में शामिल किए गए हैं।
महिला सुरक्षा के लिए इसमें पैनिक बटन और विशेष निगरानी की सुविधा जोड़ी गई है। अब नागरिक स्मार्टफोन ऐप, जीपीएस, सोशल मीडिया और चैटबॉट के माध्यम से भी चौबीस घंटे मदद पा सकेंगे। इसके अतिरिक्त, लगभग 65 लाख रुपए प्रति यूनिट लागत वाली फॉरेंसिक वैन घटनास्थल पर ही फिंगरप्रिंट डिटेक्शन, नार्कोटिक्स टेस्ट और डिजिटल फॉरेंसिक जैसी वैज्ञानिक जांच की सुविधा प्रदान करेंगी।