5 किलो एफटीएल सिलेंडरों की बिक्री तेज, 1 अप्रैल से 17.83 लाख से अधिक बिक्री

नई दिल्ली। देश में ऊर्जा आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के बीच 5 किलोग्राम वाले एफटीएल (फ्री ट्रेड एलपीजी) सिलेंडरों की बिक्री लगातार बढ़ रही है। 1 अप्रैल 2026 से अब तक 17.83 लाख से अधिक सिलेंडर बेचे जा चुके हैं, जबकि सिर्फ एक दिन में 81,000 से ज्यादा सिलेंडर की बिक्री दर्ज की गई।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों के बावजूद देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराहट में खरीदारी न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
सरकार ने प्रवासी श्रमिकों को ध्यान में रखते हुए 5 किलो एफटीएल सिलेंडरों की आपूर्ति को दोगुना कर दिया है। यह कदम जरूरतमंद वर्ग तक ईंधन की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है। मार्च 2026 से अब तक 5.27 लाख कनेक्शनों में गैस आपूर्ति शुरू हो चुकी है, जबकि 2.60 लाख नए कनेक्शनों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार है। इस तरह कुल 7.87 लाख कनेक्शन तैयार हो चुके हैं और 5.97 लाख नए ग्राहकों ने पंजीकरण कराया है।
एलपीजी की जमाखोरी रोकने के लिए देशभर में अभियान चलाए जा रहे हैं। हाल ही में 2300 से अधिक छापे मारे गए, 307 वितरकों पर जुर्माना लगाया गया और 70 वितरकों को निलंबित किया गया है।
देशभर में पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं। कहीं भी भीड़भाड़ या कमी की सूचना नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सरकार के अनुसार, सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में भारतीय जहाजों से जुड़ी कोई घटना नहीं हुई है। देशभर के बंदरगाहों पर संचालन सामान्य है और किसी तरह की भीड़भाड़ नहीं है।
विदेश मंत्रालय खाड़ी और पश्चिम एशिया में हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। भारतीय दूतावास 24×7 हेल्पलाइन के जरिए नागरिकों की मदद कर रहे हैं और अब तक हजारों भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की गई है।
28 फरवरी से अब तक लगभग 12.38 लाख यात्री पश्चिम एशिया से भारत लौट चुके हैं। विभिन्न देशों से भारत के लिए उड़ान सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं।
सरकार ने नागरिकों से ऊर्जा संरक्षण करने और पीएनजी, इलेक्ट्रिक या इंडक्शन जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की है, ताकि एलपीजी पर दबाव कम किया जा सके।