ईरानी युद्धपोत के डॉकिंग के लिए ईरान ने भारत का किया धन्यवाद : विदेश मंत्री एस जयशंकर

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच भारत ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस लवन को कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति दी। इसे लेकर ईरान ने भारत के प्रति आभार व्यक्त किया है। ईरान ने भारत के इस कदम को “मानवीय” बताया। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान इसकी जानकारी दी।
पश्चिम एशिया संघर्ष में बदलते हालात पर राज्यसभा में जयशंकर ने कहा कि मौजूदा हालात में ईरान के साथ उच्च स्तरीय संपर्क बनाए रखना मुश्किल रहा है, हालांकि मौजूद चैनलों के जरिए डिप्लोमैटिक बातचीत जारी है। विदेश मंत्री ने कहा, “हालांकि कोशिशें की गई हैं, लेकिन इस समय नेतृत्व के स्तर पर ईरान के साथ संपर्क करना साफ तौर पर मुश्किल है। हालांकि, मैंने 20 फरवरी, 2026 और 5 मार्च, 2026 को विदेश मंत्री अराघची से बात की है। हम आने वाले दिनों में ये उच्च स्तरीय बातचीत जारी रखेंगे।”
इस दौरान उन्होंने कोच्चि में अभी डॉक किए गए ईरानी नेवी के जहाज का भी जिक्र किया। विदेश मंत्री ने उन हालातों के बारे में बताया जिनके तहत भारत ने जहाज को भारतीय पोर्ट में आने की इजाजत दी थी। बता दें, यह तब हुआ जब श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना के डूबने की घटना घटी। लगभग उसी समय, एक और ईरानी नौसेना का जहाज इस इलाके में काम करते समय तकनीकी दिक्कतों का सामना करने के बाद मदद मांगने के लिए भारत से संपर्क कर चुका था।
ईएएम जयशंकर ने कहा, “ईरानी पक्ष ने 20 फरवरी, 2026 को इस इलाके के तीन जहाजों को हमारे पोर्ट पर डॉक करने की इजाजत मांगी थी। यह 1 मार्च, 2026 को मिल गई। आईआरआईएस लवन असल में 4 मार्च, 2026 को कोच्चि में डॉक हुआ। क्रू अभी भारतीय नौसेना फैसिलिटी में है। हमारा मानना ​​है कि यह करना सही है। ईरानी विदेश मंत्री ने इस इंसानियत भरे काम के लिए हमारे देश का शुक्रिया अदा किया है।”
विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में चल रही अस्थिरता के बीच भारत की एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़ी चिंताओं पर भी बात की और कहा कि हालात को मैनेज करते हुए, सरकार ने भारतीय कंज्यूमर्स के हितों को “सबसे जरूरी प्राथमिकता” के तौर पर रखा है। उन्होंने कहा, “सबसे पहले, भारत शांति के पक्ष में है और बातचीत और डिप्लोमेसी पर लौटने की अपील करता है। हम तनाव कम करने, संयम बरतने और आम लोगों की सुरक्षा पक्का करने की वकालत करते हैं। दूसरी बात, इस इलाके में भारतीय समुदाय की भलाई और सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। हम इस दिशा में इलाके की सरकारों के साथ काम करते रहेंगे।”
राज्यसभा में अपने संबोधन के आखिर में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “आखिर में, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार सहित हमारा राष्ट्रीय हित हमेशा सबसे ऊपर रहेगा।”