मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण वैन से राष्ट्रीय राजमार्गों पर रखी जाएगी निर्माण गुणवत्ता पर करीब से नज़र

नई दिल्ली। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की प्रायोगिक परियोजना में मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण वैन (एमक्यूसीवी) का इस्तेमाल करके राष्ट्रीय राजमार्गों पर निर्माण गुणवत्ता पर करीब से नज़र रखी जाएगी। यह प्रायोगिक परियोजना चार राज्यों—राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और ओडिशा में लागू की गई है।
इन मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण वैन का इस्तेमाल वर्तमान में जारी राष्ट्रीय राजमार्गों के कार्यों की गुणवत्ता का जल्दी पता लगाने के लिए किया जाएगा। हर मोबाइल वैन चलती-फिरती प्रयोगशाला की तरह कार्य करती है, जो नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग इंस्ट्रूमेंट्स से पूरी तरह लैस होती है। इस वैन में अल्ट्रासोनिक पल्स वेलोसिटी मीटर, रिबाउंड हैमर, एस्फाल्ट डेंसिटी गेज और रिफ्लेक्टोमीटर इत्यादि शामिल हैं।
एमक्यूसीवी में एडवांस्ड नॉन– डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग इंस्ट्रूमेंट्स का सेट होता है, जिससे निर्माण में रुकावट डाले बिना गुणवत्ता जांची जा सकती है।
रिबाउंड हैमर– इस टेस्ट का इस्तेमाल सतह की कठोरता का पता लगाने और साइट पर सख्त कंक्रीट स्ट्रक्चर की मजबूती का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है।
अल्ट्रासोनिक पल्स वेलोसिटी मीटर- यह कंक्रीट में ध्वनि की तरंगें भेजता है, जिससे छिपी हुई दरारें, खाली जगहें और कमियां पता चलती हैं।
एस्फाल्ट डेंसिटी गेज- ये पोर्टेबल डिवाइस हैं जो सही एस्फाल्ट कॉम्पैक्शन और पेवमेंट की लंबी उम्र सुनिश्चित करने के लिए साइट पर तेजी से, नॉन-न्यूक्लियर टेस्टिंग करना सुगम बनाते हैं।
लाइट-वेट डिफ्लेक्टोमीटर- यह कॉम्पैक्ट मिट्टी और दानेदार सब-बेस के घनत्व का अनुमान लगाने में मदद करता है ताकि लंबे समय तक चलने वाले राजमार्गों के लिए स्थिर आधार सुनिश्चित किया जा सके।
रिफ्लेक्टोमीटर- यह सड़क के संकेतों और चिह्नों की दृश्यता का आकलन करता है। यह सुनिश्चित करता है कि वे दिन-रात मोटर चालकों के लिए स्पष्ट रूप से पठनीय रहें।
ये प्रौद्योगिकी मिलकर गुणवत्ता नियंत्रण को रिएक्टिव प्रोसेस से बदलकर भारत के राजमार्गों पर सुरक्षा, टिकाऊपन और विश्वास का अतिसक्रिय, ऑन-साइट आश्वासन देती हैं।
परीक्षण के निष्कर्ष मंत्रालय अपने क्षेत्र कार्यालय के साथ साझा करेगा और अगर गुणवत्ता में कोई कमी पाई जाती है, तो क्षेत्र कार्यालय सही कार्रवाई करेगा। जैसे-जैसे प्रायोगिक परियोजना अपने अगले चरण में जाएगी, मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्ग गुणवत्ता निगरानी पोर्टल बना रहा है जो इन वैन से बनी टेस्ट रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध कराएगा। यह पोर्टल मोबाइल वैन की रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग देता है। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुणवत्ता जांच की पारदर्शी निगरानी और आंकड़ों पर आधारित अनुवीक्षण हो सकेगा।
इस मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली का विस्तार अन्य राज्यों में होने वाला है- सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पहले ही 11 राज्यों में एमक्यूसीवी के अगले चरण की योजना बना ली है। इनमें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम और मेघालय शामिल हैं।