मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि किसानों के हित में सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। राज्य सरकार ने गन्ना की दर 355 रूपए प्रति क्वींटल तय की है। उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए वैकल्पिक कृषि करने की आवश्यकता है। मंत्री सिंहदेव ने कहा कि शक्कर कारखाना में गन्ना की आपूर्ति के लिए किसान बड़ी संख्या में अपने खेत में इसका उत्पाद कर लाभ उठा सकते हैं।

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कारखाना स्थापना से क्षेत्र के गन्ना उत्पादक कृषकों की जीवन स्तर में सुधार आया है। कारखाना के पेराई सत्र एवं मरम्मत कार्य के दौरान प्रति दिवस आस-पास के गांवों के लगभग 300-400 मजदूरों, बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे उनके आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। कारखाने में 20 केएलपीडी ईथेनॉल प्लांट स्थापना हेतु बसंतदादा शर्करा संस्थान पुणे से डीपीआर तैयार कराया जा चुका है। राज्य शासन से इसका प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है, जिससे संस्था की आय में अतिरिक्त लाभ अर्जित होगी। कारखाने में 6 मेगावाट को-जनरेशन पावर प्लांट स्थापना हेतु राज्य शासन से 2 करोड़ 2 लाख अंशपूंजी के रूप में स्वीकृत किया गया है। कारखाने में 20 हजार मीट्रिक टन का नवीन स्थायी शक्कर गोदाम निर्माण एवं 5 हजार मीट्रिक टन मोलासिस टैंक निर्माण कार्य का भूमिपूजन मंत्री श्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम द्वारा किया जा चुका है।

गन्ना पेराई सत्र 2020-21 में जिला सरगुजा, सूरजपुर एवं बलरामपुर के 15 विकाख खण्डों से गन्ना रकबा 8689.846 हेक्टेयर से 03 लाख मीट्रिक टन पेराई करने का लक्ष्य रखा गया था। जिसके विरूद्ध में गन्ना उत्पादक 10,600 कृषकों से कुल 2 लाख 2 हजार 617 मीट्रिक टन गन्ना की खरीदी की गई। गन्ने खरीदी पर 270. 75 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना मूल्य राशि 54 करोड़ 86 लाख रूपय भुगतान कृषकों के बैंक खाता के माध्यम से कर दिया गया है। किसानों को राज्य शासन द्वारा राशि 12 करोड़ 18 लाख 7 हजार 422 रूपए का गन्ना बोनस का भुगतान किया जा चुका है।

    गन्ना पेराई सत्र 2021-22 में जिला- सूरजपुर, सरगुजा (अम्बिकापुर) एवं बलरामपुर के तीनों जिलों के 17 विकास खण्डों से गन्ना रकबा 9,374.874 हेक्टेयर से तीन लाख मीट्रिक टन गन्ना पेराई करने का अनुमानित लक्ष्य रखा गया है। पंजीकृत 15 हजार 310 कृषकों से गन्ना क्रय किया जायेगा। गन्ना पेराई वर्ष 2021-22 के लिए उचित और लाभकारी मूल्य का निर्धारण दर रिकव्हरी प्रतिशत 9.5ः पर निर्धारित रूपये 275.50 प्रति क्विंटल है। राज्य शासन द्वारा गन्ना प्रोत्साहन राशि रूपये 79.50 प्रति क्विंटल कुल 355 प्रति क्विंटल भुगतान किया जावेगा, साथ ही रिकव्हरी 9.5ः से अधिक होने पर 0.1ः पर 2.90 रूपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त गन्ना मूल्य भुगतान किया जावेगा।

    कार्यक्रम में अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक सरगुजा रामदेव राम, अध्यक्ष श्रम कल्याण बोर्ड शफी अहमद, उपाध्यक्ष जितेन्द्र दुबे, अध्यक्ष मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाना विद्यासागर सिंह अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, गन्ना उत्पाद किसान और अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

 

 

 

 

ट्विटर इंक के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैक डॉर्सी ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. अपने इस्तीफे में जैक डॉर्सी ने कहा कि कंपनी में सह-संस्थापक से सीईओ, फिर अध्यक्ष, कार्यकारी अध्यक्ष, अंतरिम-सीईओ से सीईओ तक की भूमिका निभाने के लगभग 16 सालों के बाद मैंने फैसला किया कि आखिरकार मेरे जाने का समय आ गया है. पराग अग्रवाल हमारे सीईओ बन रहे हैं.

 

डॉर्सी 2022 में अपना कार्यकाल समाप्त होने तक बोर्ड में बने रहेंगे. अग्रवाल 2017 से सीटीओ और 2011 से ट्विटर में हैं. वहीं नया सीईओ नामित किए जाने के बाद ट्विटर के सीटीओ पराग अग्रवाल ने कहा कि मैं सम्मानित और विनम्र हूं.

 

इससे पहले एक रिपोर्ट को लेकर ट्विटर के शेयरों में उछाल आया था. रिपोर्ट में कहा गया था कि सह-संस्थापक डॉर्सी कंपनी के मुख्य कार्यकारी के रूप में पद छोड़ देंगे. ट्विटर का स्टॉक जिसने बाजार में लगातार खराब प्रदर्शन किया है, ट्रेडिंग रुकने की खबर से पहले सोमवार को ओपनिंग बेल पर 10 फीसदी से अधिक उछल गया.

 

सीएनबीसी ने सबसे पहले गुमनाम स्रोतों का हवाला देते हुए बताया कि जैक डॉर्सी जल्द ही पद छोड़ सकते हैं. रविवार को डॉर्सी ने ट्वीट कर कहा कि आई लव ट्विटर. डोर्सी स्क्वायर में शीर्ष कार्यकारी भी हैं और कुछ बड़े निवेशकों ने खुले तौर पर सवाल किया है कि क्या वो प्रभावी रूप से दोनों का नेतृत्व कर सकते हैं.

 

 

कलेक्टर रानू साहू ने अपने गढ़-उपरोड़ा प्रवास के दौरान राज्यपाल के साथ फोटो खिंचवाकर सभी को अचंभित कर दिया। परंतु यह राज्यपाल किसी राज्य के संवैधानिक मुखिया नहीं बल्कि कक्षा छठवीं में पढ़ने वाला बालक था। कलेक्टर इस पहाड़ी कोरवा विद्यार्थी की पढ़ाई-लिखाई और बात करने के तरीके के साथ-साथ उसके ’राज्यपाल’ नाम से भी खासी प्रभावित हुईं और उसके साथ फोटो खिंचाने की इच्छा जाहिर कर दी। कलेक्टर साहू ने कल गढ़-उपरोड़ा पहुंचकर वहां के आदिवासी बालक आश्रम का आकस्मिक निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने आश्रम में रहकर पढ़ने वाले विद्यार्थियों से भी मुलाकात की। कलेक्टर को जब एक विद्यार्थी ने अपना नाम राज्यपाल बताया तो रानू साहू ने हैरानी व्यक्त की और उसके साथ फोटो खिंचवाने की इच्छा जाहिर की। कलेक्टर ने राज्यपाल से उसकी पढ़ाई के बारे में भी पूछा। कक्षा छठवीं के छात्र राज्यपाल ने कलेक्टर को बताया कि वह दूरस्थ वनांचल क्षेत्र कदमझरिया का रहने वाला है। विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा वर्ग का यह छात्र अपनी पढ़ाई के लिए परिवार से दूर गढ़-उपरोड़ा के आदिवासी बालक आश्रम में रह रहा है। कलेक्टर साहू ने छात्र से आश्रम में रहने, खाने और पढ़ने की सुविधाओं के बारे में भी पूछा। राज्यपाल ने बताया कि आश्रम में रहने की व्यवस्था अच्छी है। अभी पूरे हॉस्टल का जीर्णोद्धार हुआ है। हॉस्टल में टाइल्स लगे हैं। अच्छे पलंग और बिस्तर भी आए हैं। छात्र ने बताया कि ठण्ड के मौसम को देखते हुए हॉस्टल से ओढ़ने के लिए ब्लैंकेट भी सभी छात्रों को दिए गए हैं। राज्यपाल ने यह भी बताया कि मेन्यू के हिसाब से रोज नाश्ता और दोनों समय भोजन भी छात्रों को मिलता है। इसके साथ ही पढ़ने के लिए किताबें, पलंग के पास ही टेबल और सामान रखने के लिए रैक भी हॉस्टल में उपलब्ध है।

साफ-सफाई के बारे में पूछने पर छात्रों ने कलेक्टर को बताया कि आश्रम के शौचालयों को भी रिनोवेट किया गया है। टाइल्स युक्त साफ-सुथरे शौचालयों में लगातार पानी की भी व्यवस्था के लिए नल लगाए गए हैं। कलेक्टर ने भी हॉस्टल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अच्छी व्यवस्थाओं के लिए सहायक आयुक्त को बधाई दी। रानू साहू ने सभी विद्यार्थियों को मन लगाकर पढ़ने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को आश्वस्त किया कि उनकी पढ़ाई के लिए अच्छा माहौल देने और सभी सुविधाएं देने में प्रशासन हमेशा तत्पर रहेगा।

 

 

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड के ग्राम धौराभाठा के जे एस फॉर्म पहुंचेे। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने धौराभाठा पहुंचते ही 450 एकड़ जे एस फॉर्म और जे एस डेयरी का भ्रमण किया।

राज्यपाल आचार्य देवव्रत जे एस फॉर्म के संस्थापक वजीर सिंह लोहान द्वारा ’जहर मुक्त खेती, जहर मुक्त रसोई’ विषय पर आयोजित किसान संगोष्ठी में शामिल हुए। उन्होंने आम जनों और किसान भाइयों से इंटरएक्टिव लेवल पर चर्चा की। उन्होंने खेती को लेकर अपने विगत वर्षों के अनुभव को किसानों के साथ साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र में 200 एकड़ खेत में 100 एकड़ में उनके द्वारा खेती की जाती थी और बचे 100 एकड़ अन्य को खेती के लिए दिए थे। 3 वर्षों के बाद अन्य पक्ष के द्वारा वहां खेती बंद कर दी गई और उन्हें उस भूमि को बंजर बना कर सौंपा गया। जब उन्होंने भूमि के मिट्टी का परीक्षण कराया तो उस मिट्टी का ऑर्गेनिक कार्बन 0.54 आया, जिसे बंजार धरती माना जाता है। कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी कि संतुलित रासायनिक खाद के द्वारा भूमि को 10-15 वर्षों में रिवर्स किया जा सकता है, परंतु श्री आचार्य देवव्रत द्वारा प्रकृति के सिद्धांत का पालन करते हुए जीवामृत खाद का प्रयोग कर खेती की गई, जिसमें 2 वर्ष के अंतराल में ही मिट्टी में सभी उर्वरक तत्व प्राप्त हुए और बहुत अच्छी फसल भी प्राप्त हुई।

    राज्यपाल ने कहा कि परंपरागत खेती के साथ किसान आधुनिक खेती से कैसे तालमेल बैठाए और जैविक खेती को कैसे बढ़ावा दिया जा सके, यही उनकी चर्चा का मुख्य विषय था। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि कोई भी चीज अच्छी मिले तो उससे तत्काल जुड़े और अपनी विवेक का प्रयोग करें, इससे सफलता जरूर मिलेगी। उन्होंने किसान भाइयों से कहा कि लोकल गायों को घरों में स्थान दें, उनमें 300 से 500 करोड़ बैक्टीरिया बनाने की क्षमता होती है जो कि मिट्टी के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होती है। उन्होंने खेती में केंचुए के महत्व को बताया लोगों से अपील की कि फसल विविधता द्वारा वह पर्यावरण में भी योगदान दे सकते हैं, फसल विविधता से आच्छादन की स्थिति निर्मित होती है। आच्छादन से धरती का तापमान नहीं बढ़ता है, जिससे हम ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ने से रोक सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम प्राकृतिक खेती के माध्यम से धरती को जितना कम छेड़ेंगे हमारे लिए उठना बेहतर होगा। उन्होंने आगे कहा कि आने वाली पीढ़ी के लिए बंजर भूमि ना छोड़े इसके लिए आवश्यक है कि जो नियम जंगल में काम करता है, वही हमारे खेत में भी काम करें।

     राज्यपाल ने कहा कि जैविक खेती के लाभ को समझाते हुए किसान भाइयों से अपील की कि वह अपना कदम इस ओर आगे बढ़ाएं-देश को आर्थिक मजबूती दे, वाटर रिचार्ज कर आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराएं, देसी गाय को बचाएं, अपने परिवार को जहर मुक्त खेती और रसोई उपलब्ध कराकर उन्हें अस्पतालों से बचाएं और ग्लोबल वार्मिंग जैसे समस्या पर भी अपना योगदान दें। इस अवसर पर श्री अनिल चौहान, प्रगतिशील किसान और आमजन उपस्थित थे।

 

रायपुर, 28 नवम्बर 2021/ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के घोषणा के अनुरूप संस्कृति विभाग के विभिन्न प्रभागों को एक अम्ब्रेला के नीचे लाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के लिए अशासकीय क्षेत्र के 15 सदस्यों का मनोनयन किया गया है। इस आशय का आदेश मंत्रालय, महानदी भवन नवा रायपुर स्थित संस्कृति विभाग द्वारा जारी कर दिया है।

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शासन द्वार जारी आदेश अनुसार नामांकित सदस्यांे में राज्य के साहित्य और कला क्षेत्र से संबंधित व्यक्ति विजय गुप्त, अम्बिकापुर साहित्य के क्षेत्र से, भूपेश तिवारी कोण्डागांव आदिवासी-लोककला के क्षेत्र से, सुनिता वर्मा भिलाई चित्रकला-मूर्तिकला के क्षेत्र से, भूपेन्द्र साहू रायपुर नाट्यकला के क्षेत्र से, पद्मश्री ममता चन्द्राकर, कुलपति इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ को शास्त्रीय-लोक संगीत के क्षेत्र से, कालीचरण यादव बिलासपुर और वासंती वैष्णव नृत्य विशेषज्ञ रायगढ़ को नृत्य के क्षेत्र से सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इसी प्रकार कला साहित्य में रूचि रखने वाले छत्तीसगढ़ से भारतीय संसद में निर्वाचित सदस्य दीपक बैज सांसद बस्तर को भी सदस्य नामांकित किया गया है। Screenshot 2021 11 29 01 18 08 43

उल्लेखनीय है कि परिषद के अंतर्गत कुल 6 प्रभाग है, जिनमें साहित्य अकादमी में पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी पीठ, श्रीकांत वर्मा पीठ और गुरू घासीदास शोध पीठ होंगे। साहित्य अकादमी के इन तीनों पीठों के अध्यक्ष भी परिषद के सदस्य होंगे। शेष अन्य 5 प्रभागों के सदस्य होंगे। इस प्रकार सदस्यों की संख्या 8 होगी। अध्यक्ष साहित्य अकादमी में ईश्वर सिंह दोस्त, पिथौरा-भोपाल, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी पीठ में ललित कुमार भिलाई, श्रीकांत वर्मा पीठ में रामकुमार तिवारी बिलासपुर, अध्यक्ष आदिवासी एवं लोककला अकादमी में नवल शुक्ल अम्बिकापुर, अध्यक्ष कला अकादमी में योगेन्द्र त्रिपाठी खैरागढ़-भिलाई को सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है। इसी प्रकार अध्यक्ष द्वारा मनोनित दो सदस्यों में विनोद वर्मा रायपुर और जयंत देशमुख रायपुर को परिषद में शामिल किया गया है। इन मनोनीत सदस्यांे का कार्यकाल दो वर्षों के लिए निर्धारित होगा।

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