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हैदराबाद: भारत के आम नागरिकों को जल्द ही रूस की एक डोज वाली स्पुतनिक-वी वैक्सीन मिलना शुरू हो जाएगी. आज स्पूतनिक-वी वैक्सीन का दूसरी खेप हैदराबाद आ गई है. इससे पहले टीके की  पहली खेप एक मई को भारत पहुंची थी. 13 मई को सेंट्रल ड्रग लेबोरटरी, कसौली से वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है. वैक्सीन की आपूर्ति भारतीय मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स से शुरू होगी.

अगले हफ्ते से देश में स्पुतनिक वैक्सीन लगनी शुरू हो सकती है. जुलाई से स्पुतनिक का देश में उत्पादन शुरू होने लगेगा. फिलहाल देश में टीकाकरण अभियान में दो वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है. स्पुतनिक वी को रूस के गामालेया नेशनल सेंटर द्वारा विकसित किया गया है.

भारत में रूस के राजदूत निकोले कुदाशेव ने कहा, रूस के विशेषज्ञों ने इस बात की घोषणा की है कि ये वैक्सीन कोविड के नए स्ट्रेन के लिए भी कारगर है. वैक्सीन की कीमत वर्तमान में 948 रुपये और 5 फीसदी जीएसटी प्रति डोज के एमआरपी पर है.

इस साल 85 करोड़ डोज का होगा उत्पादन

रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) के सीईओ किरिल्ल दमित्रिएव ने कहा, “स्पुतनिक-V रूस-भारत की एक वैक्सीन है. इसके एक बड़े हिस्सा का उत्पादन भारत में किया जाएगा. हम यह उम्मीद करते हैं कि इस साल भारत में स्पुतनिक-V के 85 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन का निर्माण किया जाएगा. हम जल्द भारत में स्पुतनिक-V लाइट वैक्सीन के लगाने की उम्मीद करते हैं.”

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के छोटे भाई असीम बनर्जी का आज निधन हो गया है. असीम कोरोना वायरस से संक्रमित थे और पिछले एक महीने से कोलकाता के मेडिका सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था.

रिपोर्ट के मुताबिक आज सुबह उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। कोलकाता के मेडिका सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ.आलोक रॉय ने जानकारी देते हुए बताया कि ममता बनर्जी के छोटे भाई असीम का अस्पताल में इलाज चल रहा था। शनिवार सुबह असीम बैनर्जी ने आखिरी सांस ली। सीएम ममता बनर्जी के पारिवारिक सूत्रों के अनुसार अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए किया जाएगा।

बंगाल में कोरोना संक्रमण का प्रकोप बहुत तेजी से फैल रहा है. हर दिन रिकॉर्ड स्तर पर नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं और 100 से ज्यादा संक्रमितों की मौत हो रही है.

बंगाल में कोविड के एक दिन में सर्वाधिक नए मामले

पश्चिम बंगाल में कल सबसे ज्यादा 20,846 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 10 लाख 94 हजार 802 हो गए है. स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि बीमारी से 136 और लोगों की मौत होने के बाद मृतक संख्या 12,993 हो गई है. हालांकि राज्य में गुरुवार से 19,131 लोग स्वस्थ हुए हैं.

देश में कोरोना की स्थिति

भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 3 लाख 26 हजार 98 नए मामले सामने आए हैं और 3890 लोगों की मौत हुई है. बुधवार को, भारत में कोरोना से 4205 लोगों की मौत हुई थी. जबकि 7 मई को देश में अब तक के सबसे ज्यादा 4,14,188 मामले दर्ज किए थे. भारत में अब तक 36,73,802 एक्टिव केस और 2,66,207 मौतों के साथ कोविड मामलों की कुल संख्या 2 करोड़ 43 लाख 72 हजार 907 है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले 24 घंटों में कुल 3,53,299 लोगों को छुट्टी दे दी गई है, अबतक 2,04,32,898 लोग कोविड से ठीक हो चुके हैं. देश में अब तक कुल 18,04,57,579 लोगों को टीका लगाया गया है, जिनमें 11,03,625 लोगों को पिछले 24 घंटों में टीका लगाया गया है.

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देश में कोरोना के हालात पर पीएम नरेंद्र मोदी ने उच्चस्तरीय बैठक की. इसमें उन्होंने कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा की और घर-घर जाकर कोविड टेस्ट किए जाने की बात कही. पीएम मोदी ने कहा कि गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाई जाएं और आशा कार्यकर्ताओं से मिलकर कोविड की लड़ाई में तेजी लाई जाए.

पीएम मोदी ने कहा कि गांवों तक ऑक्सीजन की सप्लाई के इंतजाम हों. प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, पीएम ने निर्देश दिया है कि ज्यादा संक्रमण दर वाले इलाके में कोविड-19 की जांच बढ़ाए जाने की जरूरत है. समय की मांग है कि स्थानीय स्तर पर रोकथाम की रणनीति अपनायी जाए.

प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक वितरण योजना तैयार की जाए, जिसमें ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स का प्रावधान शामिल है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे उपकरणों के संचालन में स्वास्थ्य कर्मियों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए और ऐसे चिकित्सा उपकरणों के सुचारू संचालन के लिए बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए।

वेंटिलेटर का उपयोग सही से नहीं होने पर जताई नाराजगी

प्रधानमंत्री ने कुछ राज्यों में वेंटिलेटर का उपयोग सही से नहीं होने के कुछ रिपोर्टों को गंभीरता से लिया और निर्देश दिया कि केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए गए वेंटिलेटर की स्थापना और संचालन का तत्काल ऑडिट किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि आवश्यक हो तो स्वास्थ्य कर्मियों को वेंटिलेटर के ठीक से संचालन के लिए प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

पीएम ने कहा कि कोविड के खिलाफ भारत की लड़ाई को वैज्ञानिकों और विषय विशेषज्ञों द्वारा निर्देशित किया गया है और यह उनके द्वारा निर्देशित किया जाता रहेगा। अधिकारियों ने पीएम को टीकाकरण प्रक्रिया और 45+ आबादी के राज्यवार कवरेज के बारे में जानकारी दी। भविष्य में वैक्सीन की उपलब्धता के रोडमैप पर भी चर्चा की गई। उन्होंने अधिकारियों को टीकाकरण की गति तेज करने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया।

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पीएम मोदी ने 9.5 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 20,000 करोड़ रुपये की 8वीं किस्त जारी कर दी है. प्रधानमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए किस्त जारी की. इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री और कई सांसद भी उपस्थित थे. प्रधानमंत्री ने कुछ किसान लाभार्थियों से बातचीत भी की. इसके बाद देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने सबसे पहले ईद और अक्षय तृतीया की शुभकामनाएं दी.

पीएम मोदी ने कहा, इस कोरोना काल में भी देश के किसानों ने हमारे कृषि क्षेत्र में अपने दायित्व को निभाते हुए अन्न की रिकॉर्ड पैदावार की है. बंगाल के लाखों किसानों को आज से पहली बार किसान निधि योजना का लाभ मिलना शुरू हुआ है. उनको पहली किस्त मिल चुकी है. जैसे-जैसे राज्यों से किसानों के नाम केंद्र सरकार को मिलेंगे, वैसे वैसे लाभार्थी किसानों की संख्या और बढ़ती जाएगी.

पीएम मोदी ने आगे कहा, कोरोना काल में भारत दुनिया कि सबसे बड़ी मुफ्त राशन की योजना चला रहा है. पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से पिछले वर्ष 8 महीने तक गरीबों को मुफ्त राशन दिया गया था. इस बार मई और जून में देश के 80 करोड़ से ज्यादा साथियों को राशन मिले, इसका प्रबंध किया गया है.

बता दें, पीएम-किसान योजना के तहत, लाभार्थी किसान परिवारों को हर साल 6,000 रुपये भेजे जाते हैं. ये पैसे हर साल चार-चार महीनों के अंतराल पर तीन किस्तों में दिए जाते हैं. फंड सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाते हैं. अभी तक सात किस्त मिलाकर किसानों के खातों में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए भेजे जा चुके हैं.

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हरियाणा के पलवल जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है। राजधानी दिल्ली के नजदीक पलवल में युवती के साथ 25 लोगों ने गैंगरेप किया। फेसबुक पर दोस्ती कर युवक ने युवती को होटल बुलाया। उसके बाद रामगढ़ के जंगल में ले जाकर रात भर गैंगरेप किया गया।

 

दरिंदगी की हदें पार करते हुए युवती को सुबह होने पर एक कबाड़ी के पास छोड़ा गया, जहां फिर से गैंगरेप किया गया। लाचार लड़की की हालत बिगड़ने पर बेहोशी की हालत में उसे बदरपुर बॉर्डर छोड़कर आरोपी फरार हो गए। इस मामले में पुलिस ने 25 लोगों के खिलाफ अपहरण और गैंगरेप के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की है। जानकारी के मुताबिक घटना 3 मई की है। चलने लायक हालत होने पर युवती ने अब एफआईआर दर्ज कराई है।

 

 

पुलिस जांच अधिकारी एएसआई रचना ने बताया कि एक युवती ने दी अपनी शिकायत में कहा है कि उसके दोस्त रामगढ़ निवासी सागर ने तीन मई को उसे शादी के लिए अपने परिजनों से मिलाने के लिए होडल बुलाया तो वह होडल आ गई। होडल से सागर उसे घर ले जाने की बजाय रामगढ़ गांव के निकट जंगल में एक ट्यूबवैल पर ले गया जहां उसका भाई समुंद्र व 20-22 युवक और पहुंच गए।

 

युवती ने शिकायत में कहा है कि उसी दिन से वह चारपाई में पड़ी हुई थी, जब वह चलने लायक हुई तो 12 मई को इसकी शिकायत हसनपुर थाना पुलिस को दी। हसनपुर पुलिस ने 12 मई को देर रात युवती की शिकायत पर सागर, समुंद्र व आकाश सहित 22 अन्य युवकों के खिलाफ अपहरण व सामुहिक दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

 

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जेल में फैलते कोरोना को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने लिया बड़ा फैसला 7 साल से कम की सजा पाए या छोटे अपराधो में मुकदमा का सामना कर रहे कैदियों को परोल पर रिहा करने का सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को दिया आदेश  कोर्ट ने कहा है कि सभी राज्यों में गठित हाई पावर्ड कमिटी पिछले साल जारी निर्देशों के मुताबिक कैदियों की रिहाई पर फैसला ले. गौरतलब है कि पिछले साल भी कोर्ट के आदेश पर कैदियों को अंतरिम जमानत पर छोड़ा गया था. तब छोड़े गए सभी कैदी जेल में वापस आ चुके हैं. क्षमता से अधिक भरी जेलों में बड़े पैमाने पर कैदी और कर्मचारी संक्रमित हो रहे हैं. चीफ जस्टिस एन वी रमना के सामने कल यह मामला रखा गया था. इसके बाद यह आदेश आया है.

 

पिछले साल 23 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों में कैदियों की रिहाई पर फैसला लेने के लिए उच्च स्तरीय कमिटी बनाने का आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि कमिटी यह फैसला ले कि किन सजायाफ्ता और विचाराधीन कैदियों को फिलहाल कुछ समय के लिए रिहा किया जा सकता है. कोर्ट ने यह सुझाव भी दिया था कि 7 साल से कम की सज़ा पाए या छोटे अपराधों में मुकदमे का सामना कर रहे कैदियों को परोल पर रिहा कर देना बेहतर रहेगा. कोर्ट ने इस आदेश के बाद कई महीनों तक कैदियों की रिहाई पर राज्यों से जानकारी ली थी.

 

शुक्रवार को यह मामला काफी समय बाद कोर्ट में उठा. वरिष्ठ वकील कोलिन गोंजाल्विस ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच को बताया कि कोरोना के मामले घटने के बाद लगभग कैदी जेल में लौट आए थे. इस समय अधिकतर जेल क्षमता से अधिक भरे हैं. कोर्ट को तत्काल इस बारे में आदेश देना चाहिए. उन्होंने यह मांग भी रखी कि हाई पावर्ड कमिटी फैसला लेने में समय नष्ट करे, इससे बेहतर होगा कि कोर्ट पिछले साल छोड़े गए कैदियों को इस साल भी रिहा करने को कह दे. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रमना ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा था कि वह इस मसले पर सभी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से भी चर्चा करेंगे ताकि प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके.

 

आज सुप्रीम कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर आदेश अपलोड कर दिया है. इसमें कहा गया है कि राज्यों में गठित हाई पावर्ड कमिटी पिछले साल जारी निर्देश का पालन करे. जिन कैदियों को पिछले साल छोड़ा गया था, उन्हें फिर अंतरिम रूप से रिहा किया जाए. जिन कैदियों को पिछले साल परोल मिली थी, उन्हें फिर 90 दिन के लिए छोड़ा जाए. फिलहाल सिर्फ बहुत ज़रूरी मामलों में ही गिरफ्तारी हो.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार दिल्ली को 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई रोजाना करे। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि उसका आदेश केवल एक दिन के लिए नहीं है बल्कि केंद्र अगले आदेश तक दिल्ली को रोजाना 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई करे।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि हमें कड़े आदेश देने के लिए बाध्य नहीं करें। हम काम चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को 1200 मीट्रिक टन की सप्लाई करने का आदेश दिया है वह सही है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि अगर सभी हाईकोर्ट ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर ऐसे ही आदेश देने लगे तो बड़ी समस्या शुरू हो जाएगी। केंद्र ने कहा कि हाईकोर्ट को ही ऑक्सीजन का पूरा स्टॉक सौंप दिया जाए और वे ही इसका वितरण करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला बिल्कुल सही है और हाईकोर्ट ने अपने न्यायिक अधिकारों का सही उपयोग किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। तब कोर्ट ने कहा कि हम आपकी समस्या समझ सकते हैं लेकिन क्या होगा अगर किसी राज्य को उसकी जरूरत का ऑक्सीजन नहीं मिले। केंद्र सरकार ने कहा कि ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए पूरे देश के बारे में सोचने की जरूरत है, इसे राज्यों के आधार पर सोचकर नहीं चला जा सकता है। अगर सभी हाईकोर्ट ऑक्सीजन की सप्लाई करने का आदेश देने लगें तो पूरा सिस्टम ठप हो जाएगा।

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 उत्तर प्रदेश,उन्नाव , मेघा तिवारी : प्रधान प्रत्याशियों पर उन्नाव पुलिस सख्त हुई और पंचायत चुनाव के बाद जीत के जश्न पे पूरी तरह सें रोक लगाई थीं लेकिन फिर भी कुछ प्रत्याशी कोविड प्रोटोकॉल तोड़ते दिखे और जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या मे लोग जन सभा करते दिखे तत्काल पुलिस को सूचना मिलते ही पुलिस ने 300 कुर्सी जब्त की मौके सें और जो आयोजक थें उनपे मुकदमा भी दर्ज किया गया।

सीओ सफीपुर डॉक्टर बीनू की बड़ी कार्यवाही करते हुवे फौरन मामले को संज्ञान मे लेते हुवे ये ऐलान भी करवाया की कोई भी प्रत्याशी जीत का जश्न ना मनाए।

कोविड प्रोटोकॉल का उलंघन करना प्रधान को भारी पड़ गया। सफीपुर के उनवा गांव में कुर्सियां डाल प्रधान समर्थकों के साथ मना रहा था जश्न, तीन सौ कुर्सियां पुलिस ने की जब्त और आगे की विधिक कार्यवाही की जा रही हैं ।

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नई दिल्ली :–मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है लोकतांत्रिक व्यवस्था में इसकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। मीडिया की विश्वसनीयता जनता के सरोकारों और जन विश्वास पर ही टिके होते हैं। मीडिया राष्ट्रीय संसाधन है। जिसे पत्रकार बंधु जन विश्वास या ट्रस्ट में प्रयोग करते हैं। परंतु वर्तमान समय में देश एवं प्रदेश में मीडिया कर्मियों के ऊपर लगातार अत्याचार हो रहे हैं सबसे बड़ी समस्या है कि वर्तमान समय में भ्रष्टाचार में लिप्त शासन प्रशासन में बैठे हुए लोग मीडिया कर्मियों को उनके कार्यों को करने में बाधा भी उत्पन्न कर रहे हैं। भारतीय मीडिया फाउंडेशन के राष्ट्रीय मैनेजमेंट अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष एवं संस्थापक एके बिंदुसार ने कहा कि वर्तमान समय में जब मीडिया अपनी सही भूमिका में उतरा है तो वहीं भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों द्वारा मीडिया कर्मियों को प्रताड़ित करके उनके मनोबल को तोड़ा जा रहा है। भारतीय मीडिया न्यूज़ एवं शहर की आवाज वाराणसी के वरिष्ठ जिला संवाददाता एवं बीएमएफ जिला अध्यक्ष वाराणसी प्रेम कुमार शर्मा से हुई एक खास बातचीत में भारतीय मीडिया फाउंडेशन के संस्थापक एके बिंदुसार ने कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारों पर अत्याचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक सोची समझी साजिश के तहत पत्रकारों के मनोबल को तोड़ा जा रहा है उनका कहना है कि अगर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ स्वतंत्र नहीं रहा पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को अपनी अभिव्यक्ति की आजादी से कार्य करने का अधिकार नहीं मिलेगा तो लोकतंत्र आने वाले दिनों में खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के लोग पत्रकार बंधुओं के उत्पीड़न पर तमाशा तो देख रहे हैं। वहीं विपक्ष में बैठे और तमाम छोटे बड़े राजनीतिक दल जो सत्ता की राजनीति में देश को समृद्ध और सशक्त बनाने का ऐलान करती है उन लोगों के द्वारा भी पत्रकार हितों को लेकर कोई आवाज नहीं उठाया जाता है इस बात को पत्रकार बंधुओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को समझना होगा। एके बिंदुसार ने कहा कि पत्रकार बंधुओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को एक मंच पर एकजुट होकर एक बड़े महामोर्चा का गठन करना होगा और पत्रकारिता धर्म को निभाते हुए लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया को संवैधानिक दर्जा दिलाने की एक महाक्रांति करनी होगी। उन्होंने देश प्रदेश के पत्रकार बंधुओं एवं पत्रकार संगठनों के सभी वरिष्ठ व कनिष्ठ पदाधिकारियों से अपील करते हुए कहा कि देश प्रदेश में कहीं भी पत्रकार बंधुओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न का मामला दिखाई दे तो हम सभी को एकजुट होकर पत्रकार बंधुओं एवं सामाजिक कार्यकर्ता बंधुओं के सम्मान में अपना आवाज बुलंद करना होगा और सत्ताधारिओं एवं प्रशासनिक अधिकारियों की जी हुजूरी बंद करना होगा। तभी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया का अस्तित्व बचेगा। उन्होंने पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि मीडिया पालिका बनवाने की आवाज को जोरदार तरीके से उठाने की जरूरत है।

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मुंबई - कामगार दिवस जिनके लिए पूरे देश में उत्सव मनाया जाता है। आज उसी देश के कामगार एक एक रूपए के लिए मोहताज़ है। इस महामारी ने उनसे उनके सारे काम-धंधे छीन लिए है। सरकार सिर्फ उनको अश्वशन दे रही है। आर्थिक सहायता देने की बात सरकार करती जरूर है पर सहायता मिलती नही है। आज तो मजदूर इतना लाचार हो गया है की घर में कोई बीमार हो जाए तो इलाज भी नही करा सकता है। इस महामारी में सरकार कामगारों के साथ आए उन्हें आर्थिक सहायता दे। ये कामगार देश की नीव के वो पत्थर है जिन पर देश टीका हुआ है। पर आज के नेता शायद ये बात भूल गए है। कामगार नेता सुरजीत सिंह ने आज कामगार दिवस के दिन ये दुःख प्रगट किया । उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है की जब तक ये महामारी है कामगारों को आर्थिक सहायता दी जाए।

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The Edition Today Magazine (July - 2020)