देश

देश (985)

 

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने राज्यपाल फागू चौहान को इस्तीफा सौप दिया ।मंगलवार को महागठबंधन की बैठक में नीतीश कुमार को समर्थन दिए जाने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि सीएम नीतीश कुमार एनडीए से अलग होंगे.

 

पार्टी के विधायकों और सांसदों की बैठक के बाद जेडीयू ने एनडीए से अलग होने का फैसला लिया, हांलाकि इसका औपचारिक ऐलान होना अभी भी शेष है. इस घटना के बाद नीतीश कुमार राज्यपाल फागू चौहान को इस्तीफा देने पहुंचे. कहा जा रहा था कि किसी भी वक्त नीतीश कुमार अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप सकते हैं लेकिन अंततः राज्यपाल ने मिलने के लिए उन्हें शाम करीब 4 बजे का वक्त दिया. नीतीश कुमार राजभवन अकेल ही इस्तीफा देने पहुंचे. उनके इस्तीफा सौंपने के साथ ही बिहार में नई सरकार के गठन का रास्ता भी साफ हो गया है.

 

बिहार में सत्ता का जो नया समीकरण होगा उसके मुताबिक जेडीयू, राजद, कांग्रेस और लेफ्ट के दल आपस में मिलकर सरकार बनाएंगे. जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार 160 विधायकों (आरजेडी-79, जेडीयू-45, कांग्रेस-19, लेफ्ट-16 और निर्दलीय-1) का समर्थन-पत्र लेकर राजभवन जाएंगे. अब सभी की निगाहें इस और टिकी है कि नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव कब राज्यपाल से मिलकर नई सरकार बनाने का दावा पेश करते हैं.इस तरह नीतीश कुमार और बीजेपी की राहे अलग हो गई।

शेयर करे...

उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को सोमवार को उच्च सदन में विदाई दी जा रही है। राज्यसभा में फेयरवेल स्पीच में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भावुक नजर आए। पीएम मोदी ने कहा कि आज हम सब यहां राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू को उनके कार्यकाल के समापन पर धन्यवाद देने के लिए मौजूद हैं। यह इस सदन के लिए बहुत ही भावुक क्षण है। सभा के कई ऐतिहासिक क्षण आपकी गरिमामयी उपस्थिति से जुड़े हैं।

पीएम मोदी ने नायडू को संबोधित करते हुए कहा कि आपके वन-लाइनर्स विट-लाइनर्स हैं। वे विन-लाइनर भी हैं। इसका मतलब है कि उन लाइनों के बाद और कुछ और कहने की जरूरत नहीं पड़ती है। आपका हर एक शब्द सुना जाता है और पसंद भी किया जाता है। सदन में कभी भी उनका काउंटर नहीं होता है।

मोदी बोले- नायडू ने हमेशा युवाओं के लिए किया काम
मोदी ने उपराष्ट्रपति नायडू को युवाओं और सांसदों के लिए प्रेरणास्रोत करार दिया है। उन्होंने कहा कि लोग समाज, देश और लोकतंत्र के बारे में उनसे बहुत कुछ सीख सकते हैं। राज्यसभा के सभापति नायडू को उच्च सदन में विदाई देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह देश के एक ऐसे उपराष्ट्रपति हैं, जिन्होंने अपनी सभी भूमिकाओं में हमेशा युवाओं के लिए काम किया। साथ ही सदन में भी हमेशा युवा सांसदों को आगे बढ़ाया और उन्हें प्रोत्साहन दिया।

पीएम मोदी ने नायडू के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि इस अवधि में सदन के कामकाज में वृद्धि हुई। उन्होंने कहा, 'आपने देश के लिए और सदन के लिए जो कुछ किया है, उसका ऋण स्वीकार करते हुए आपको भविष्य के लिए बहुत शुभकामनाएं देता हूं। इस सदन को नेतृत्व देने की जिम्मेदारी भले ही पूरी हो रही हो लेकिन उनके अनुभव का लाभ भविष्य में देश को मिलता रहेगा। साथ ही हम जैसे अनेक सार्वजनिक जीवन के कार्यकर्ताओं को भी मिलता रहेगा।'

नए युग के हाथों में देश का नेतृत्व: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव में आज देश अपने अगले 25 वर्षों की नई यात्रा शुरू कर रहा है, तब देश का नेतृत्व भी 'एक नए युग' के हाथों में है। उन्होंने कहा, 'इस बार हम एक ऐसा 15 अगस्त मना रहे हैं, जब देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष सब के सब लोग आजाद भारत में पैदा हुए हैं और सब के सब साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं। मैं समझता हूं कि इसका एक महत्व है।'

मोदी बोले- नायडू से बहुत कुछ सीख सकते हैं युवा
पीएम ने कहा कि नायडू देश के एक ऐसे उपराष्ट्रपति है, जिन्होंने अपनी सभी भूमिकाओं में हमेशा युवाओं के लिए काम किया है। उन्होंने कहा, 'आपका ये जज्बा और लगन हम लोगों ने निरंतर देखी है। मैं प्रत्येक माननीय सांसद और देश के हर युवा से कहना चाहूंगा कि वे समाज, देश और लोकतंत्र के बारे में आपसे बहुत कुछ सीख सकते हैं।'

शेयर करे...

 

 

राशन कार्ड के लाभार्थियों के लिए काम की खबर है. खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग  ने राशन कार्ड के नियमों में बदलाव का फैसला लिया है. दरअसल, विभाग ने सरकारी राशन की दुकानों से राशन लेने वाले पात्र लोगों  के लिए तय किये गए मानक में बदलाव कर रहा है. नए मानक का प्रारूप अब लगभग तैयार हो गया है. बताया जा रहा है कि इस संबंध में राज्‍य सरकारों के साथ कई दौर की बैठक भी हो चुकी है. आइए जानते हैं क्या होगा नए प्रावधान में?

अपात्र भी ले रहे हैं लाभ 

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अनुसार, इस समय देशभर में 80 करोड़ लोग नेशनल फूड सिक्‍योरिटी एक्‍ट  का लाभ उठा रहे हैं. इनमें कई लोग ऐसे भी हैं जो आर्थिक रूप से संपन्‍न हैं. इसे ध्‍यान में रखते हुए सार्वजनिक वितरण मंत्रालय मानकों में बदलाव करने जा रहा है. दरअसल, अब नए मानक को पूर्णतः पारदर्शी बनाया जाएगा ताकि किसी तरह की गड़बड़ न हो सके.

जानिए क्यों हो रहे हैं बदलाव?

इस संबंध में खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने जानकारी दी है कि राशन के मानकों में बदलाव को लेकर पिछले कई महीनों से राज्‍यों के साथ बैठक की जा रही है. राज्‍यों द्वारा दिए गए सुझाव को शामिल करते हुए पात्रों के लिए नए मानक तैयार किए जा रहे हैं. जल्दी ही ये मानक फाइनल कर दिए जाएंगे. नए मानक लागू होने के बाद केवल पात्र व्‍यक्तियों को ही लाभ मिलेगा, अपात्र लोग लाभ नहीं पा सकेंगे. यह बदलाव जरूरतमंदों को ध्‍यान में रखते हुए किया जा रहा है.

वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के मुताबिक अब तक ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड (ONORC) योजना’ दिसंबर 2020 तक 32 राज्‍यों और यूटी में लागू हो चुकी है. करीब 69 करोड़ लाभार्थी यानी एनएफएसए (NFSA) के तहत आने वाली 86 फीसदी आबादी इस योजना का लाभ ले रही है. प्रति माह करीब 1.5 करोड़ लोग एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पर जाकर भी लाभ ले रहे हैं. ऐसे में सरकार अब पत्रों को हरसंभवतः मदद करना चाहती है.

शेयर करे...

 

रायपुर, 9 जुलाई 2022 – देशभर में गैर-बिजली क्षेत्र के औद्योगिक उपभोक्ताओं की कोयले संबंधी समस्याओं को देखते हुए जाने-माने उद्योगपति नवीन जिन्दल के नेतृत्व वाली कंपनी जिन्दल स्टील एंड पावर (जेएसपी) ने स्पंज आयरन उत्पादकों के लिए विशेष कोयले की पेशकश की है, जो पर्यावरण संरक्षण में मददगार होगा ही, संसाधनों की भी बचत करेगा और किल्न की उत्पादकता व उम्र भी बढ़ाएगा।

coal event 5

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक होटल में आयोजित स्पंज आयरन उद्योगपतियों की बैठक में जेएसपी के सीईओ (स्टील) श्री डीके सरावगी ने कहा कि संस्थापक चेयरमैन श्री ओपी जिन्दल जी के दिखाए मार्ग पर चलते हुए चेयरमैन नवीन जिन्दल जी भी उद्योगों के मित्र और अग्रणी सहयोगी बने हुए हैं और यही वजह है कि उनकी कंपनी जिन्दल स्टील गैर-बिजली क्षेत्र में उत्पन्न कोयला की कमी को देखते हुए कोयले की विशेष वैरायटी मोजाम्बिक स्टीम कोल (ग्रेड वीटी-1) लेकर आई है।

 

उन्होंने कहा कि नॉन कोकिंग थर्मल कोल श्रेणी का मोजाम्बिक स्टीम कोल (ग्रेड वीटी-1) स्पंज आयरन उत्पादन में किल्न के लिए न सिर्फ उपयुक्त है बल्कि दोहरी भूमिका भी निभाता है। उत्पादन प्रक्रिया में यह ताप ऊर्जा प्रदान करने का काम करता ही है, उत्पाद में मिलावट कम करने (रिड्यूसिंग एजेंट) में भी मददगार है। इस कोयले में फिक्स्ड कार्बन की मात्रा 57 प्रतिशत है जिससे इसकी उत्पादकता अधिक है और यह 5 फीसदी तक ऊर्जा की बचत भी करता है। इसमें राख (ऐश) की मात्रा 24.2 प्रतिशत है और यह थर्मल प्लांट के लिए भी उपयुक्त है।

 

मोजाम्बिक स्टीम कोल (ग्रेड वीटी-1) से किल्न की उत्पादकता 6 प्रतिशत तक बढ़ जाती है और किल्न की उम्र भी बढ़ती है। इसके अलावा इसमें 6 प्रतिशत कम कोयला लगता है और 8 प्रतिशत तक कम ठोस कचरा निकलता है। इस कोयले के उपयोग के बाद देखा गया कि कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन 5 फीसदी से भी कम है।

 

इस अवसर पर प्रेसिडेंट प्रदीप टंडन ने कहा कि डीआरआई तकनीक के विकास में जिन्दल स्टील एंड पावर का बड़ा योगदान है। कंपनी इनोवेशन में विश्वास करती है और स्टील सेक्टर में हो रहे नए प्रयोगों को अपनाने के साथ-साथ उद्योगों के बीच साझा कर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान कर रही है। नेशनल ब्रांड मैनेजर रोहित लांबा ने कहा कि जेएसपी के उत्पादों की बाजार में अच्छी साख है और गुणवत्ता के मामले में हमारे ब्रांड का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग स्थान है।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के स्पंज आयरन उद्यमियों के अतिरिक्त मार्केटिंग विभाग के रामकिशोर समेत अनेक अधिकारी उपस्थित थे।  

शेयर करे...

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन मोदी का आज शनिवार 18 जून को 100वां जन्मदिन है। इस खास मौक पर पीएम नरेंद्र मोदी अपनी मां हीराबेन से मिलने उनके गांधीनगर स्थित आवास पर पहुंचे थे।

 download 1

पीएम मोदी ने मां से मिलकर उनका आशीर्वाद लिया और उनके पैर धोएं। इसकी तस्वीरें पीएम मोदी ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल पर शेयर की है। इसके अलावा पीएम मोदी ने अपने अधिकारिक वेबसाइट पर अपनी मां के लिए एक ब्लॉग भी लिखा है। जिसमें पीएम मोदी ने अपने माता-पिता से जुड़ी कई बातों और बचपन के दिनों को याद किया है। ऐसा पहली बार है जब पीएम मोदी ने अपने पिता का जिक्र किया है। इसी ब्लॉग में पीएम मोदी ने एक अब्बास नाम के शख्स का जिक्र किया है, जो ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है।

 Screenshot 2022 06 18 16 59 56 40

पीएम मोदी द्वारा शेयर किए गए ब्लॉग में उन्होंने बताया है कि उनका बचपन एक अब्बास नाम के मुस्लिम बच्चे के साथ बीता है। पीएम मोदी ने बताया है कि अब्बास उनके पिता के दोस्त का बेटा था। जो बचपन में उनके साथ एक ही घर में रहता था। पीएम मोदी ने ब्लॉग में लिखा, ''मां हमेशा दूसरों को खुश देखकर खुश रहा करती हैं। घर में जगह भले कम हो लेकिन उनका दिल बहुत बड़ा है। हमारे घर से थोड़ी दूर पर एक गांव था जिसमें मेरे पिताजी के बहुत करीबी दोस्त रहा करते थे। उनका बेटा था अब्बास।''

 

 

पीएम मोदी आगे लिखते हैं, ''दोस्त की असमय मृत्यु के बाद पिताजी अब्बास को हमारे घर ही ले आए थे। एक तरह से अब्बास हमारे घर में ही रहकर पढ़ा। हम सभी बच्चों की तरह मां अब्बास की भी बहुत देखभाल करती थीं। ईद पर मां, अब्बास के लिए उसकी पसंद के पकवान बनाती थीं। त्योहारों के समय आसपास के कुछ बच्चे हमारे यहां ही आकर खाना खाते थे। उन्हें भी मेरी मां के हाथ का बनाया खाना बहुत पसंद था।''

 

बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है, जब पीएम मोदी किसी मुस्लिम शख्स के साथ जुड़ी अपनी यादों का जिक्र किया हो। पीएम नरेंद्र मोदी ने पिछले साल सिंतब 2021 में तालेवाले मुस्लिम मेहरबान की कहानी भी बताई थी। पीएम मोदी ने अपने बचपन की कहानी सुनाते हुए कहा था, ''ये बात तकरीबन 55-60 साल पुरानी होगी। अलीगढ़ से जो सेल्समैन होते थे, उसमें एक मुस्लिम मेहरबान भी थे। वे हर तीन महीने हमारे गांव में आते थे। मुझे आज भी याद है कि वह काली रंग की जैकेट पहनते थे और सेल्समैन के नाते दुकान में हमेशा अपना ताला रख जाते थे। फिर तीन महीने बाद आकर अपने पैसे ले जाते थे। गांव के अगल-बगल के व्यापारियों के पास जाते थे।''

 

पीएम मोदी ने इसी का जिक्र करते हुए आगे कहा था, '''मेरे पिताजी से मुस्लिम मेहरबान की बड़ी ही अच्छी दोस्ती हो गई थी। वो जब भी आते थे तो 4-6 दिन हमारे गांव में रह जाते थे, दिनभर जो वो पैसा वसूल करके लाते थे, मेरे पिता जी के पास छोड़कर चले जाते थे। मेरे पिता जी उनके पैसों को संभाल कर रखते थे। जब मेहरबान 4-6 दिनों बाद गांव से जाते थे तो मेरे पिता से पैसे लेकर चले जाते थे।''

शेयर करे...

 

रायपुर, शुक्रवार 18/06/2022। मनीषा स्टीलिनम के डीलरों के लिए जिंदल पैंथर उड़ान 2022 डीलर्स मीट "उड़ान" का आयोजन किया जा रहा है। यह जेएसपी की वार्षिक डीलर मीटिंग योजनाओं का एक हिस्सा है। बैठक मुख्य रूप से डीलरों से जुड़ने और उन्हें नियमित रूप से उन्नत व्यापार करते रहने के लिए प्रेरित एवं प्रोत्साहित करने के लिए आयोजित की गई है।

शेयर करे...

 

केंद्र सरकार मंगलवार को रक्षा बलों के लिए अग्निपथ भर्ती योजना की घोषणा की। इसके तहत सैनिकों को सिर्फ चार साल के लिए भर्ती किया जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना में भर्ती प्रक्रिया में बड़े बदलाव के लिए अग्निपथ भर्ती योजना' ( Agnipath recruitment scheme ) का ऐलान किया।

 

राजनाथ सिंह ने बताया कि अग्निपथ भर्ती योजना के तहत सेना में चार साल के लिए युवाओं को भर्ती कराया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें नौकरी से छोड़ते वक्त सेवा निधि पैकेज मिलेगा।

 

इस योजना के तहत सेना में शामिल होने वाले युवाओं को अग्निवीर कहा जाएगा। तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस योजना का प्रेजेंटेशन भी दिया था। इस योजना के तहत सेना में युवा कम समय के लिए भर्ती हो सकेंगे। इस योजना को अग्निपथ स्कीम नाम दिया गया है। इसके तहत युवा चार साल के लिए सेना में शामिल हो सकते हैं और देश की सेवा कर सकेंगे।

 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आर्मी चीफ जनरल मनोज पांडे, एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी, नौसेना चीफ एडमिरल आर हरि कुमार की मौजूदगी में सेना की अग्निपथ स्कीम की लॉन्चिंग मौके पर कहा कि अग्निपथ योजना का लक्ष्य सैन्य सेवा की प्रोफाइल को यूजफुल रखा जाए। इससे युवाओं की हेल्थ और फिटनेस लेवल भी अच्छा रहेगा। इस योजना के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराएगा। इससे जीडीपी ग्रोथ में सहायक होगी। बेहतर पैकेज, सेवा निधि पैकेज और डिसएबिलिटी पैकेज की भी घोषणा की गई है।

 

देश सेवा के दौरान शहीद होने पर परिजनों को मिलेगी सेवा निधि

 

अगर कोई अग्निवीर देश सेवा के दौरान शहीद हो जाता है, तो उसके परिजनों को सेवा निधि समेत 1 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि ब्याज समेत मिलेगी। इसके अलावा बाकी बची नौकरी का भी वेतन दिया जाएगा। वहीं, अगर कोई अग्निवीर डिसेबिल हो जाता है, तो उसे 44 लाख रुपए तक की राशि दी जाएगी। इसके अलावा बाकी बची नौकरी का भी वेतन मिलेगा।

 

अग्निपथ योजना के तहत कितनी मिलेगी सैलरी

 

अग्निपथ योजना के तहत युवाओं को पहले साल 4.76 लाख का सालाना पैकेज मिलेगा। चौथी साल तक बढ़कर ये 6.92 लाख तक पहुंच जाएगा। इसके अलावा अन्य रिस्क और हार्डशिप भत्ते भी मिलेंगे। चार साल की नौकरी के बाद युवाओं को 11.7 लाख रुपए की सेवा निधि दी जाएगी। इस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।

 

पूरे देश में आयोजित की जाएगी भर्ती

 

अग्निवीरों की भर्ती पूरे देश में आयोजित की जाएगी। मेरिट में आए युवाओं को इसमें चुना जाएगा। चुने गए कैंडिडेट्स बतौर अग्निवीर 4 साल तक सेना में सर्विस देंगे। चार साल की सेवा के बाद अग्निवीर सेना की नौकरी छोड़ देंगे। इसके बाद वह समाज में एक स्कील्ड नागरिक के तौर पर अनुशासित जीवन जी सकते हैं। मेरिट के आधार पर और सेना की जरूरत के हिसाब से सेना 25 फीसद अग्निवीरों को रेगुलर कैडर में समायोजित कर सकती है। होलोग्राफिक्स, नाइट, फायर कंट्रोल सिस्टम से लैस होंगे जवान। हैंड हेल्ड टारगेट सिस्टम भी जवानों के हाथ में दिए जाएंगे। इसके लिए 10 हफ्ते लेकर 6 महीने तक ट्रेनिंग दिए जाएंगे। साढ़े 17 से 21 साल उम्र के युवा इसमें नौकरी पा सकते हैं।

 

 

शेयर करे...

 

आर्य समाज की ओर से जारी किया जाने वाला मैरिज सर्टिफिकेट अब कानूनी रूप से मान्य नहीं होगा। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए यही टिप्पणी की है।

 

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने कहा है कि आर्य समाज की ओर से जारी होने वाले मैरिज सर्टिफिकेट को कानूनी मान्यता नहीं दी जा रही है।

 

आर्य समाज का काम मैरिज सर्टिफिकेट देना नहीं है- SC

 

बेंच ने कहा है कि आर्य समाज का काम मैरिज सर्टिफिकेट जारी करना नहीं है। यह काम तो सक्षम प्राधिकरण ही करते हैं और उन्हीं का अधिकार क्षेत्र है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यह टिप्पणी मध्य प्रदेश के एक कपल की लव मैरिज से जुड़े एक मामले में की है। आपको बता दें कि आर्य समाज एक हिंदू सुधारवादी संगठन है और इसकी स्थापना स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में की थी।

 

क्या है पूरा मामला?

 

- दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने जिस मामले में यह टिप्पणी की है, उसमें एक लड़की के परिवार ने अपनी बच्ची के नाबालिक होने की बात कहकर लड़के पर अपहरण और दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। उस युवक ने लड़की से शादी की थी। लड़की के परिवार ने IPC की धाराओं के तहत और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पोस्को) अधिनियम की धारा 5 (एल) / 6 के तहत मामला दर्ज कराया था।

 

- आरोपी युवक इस मामले के खिलाफ कोर्ट गया, जहां उसने अपनी याचिका में कहा था कि लड़की बालिग है और हमने अपनी मर्जी से शादी की है और यह शादी आर्य समाज मंदिर में हुई थी। उस युवक ने आर्य समाज की ओर से एक विवाह प्रमाण पत्र भी कोर्ट के समक्ष पेश किया था। हालांकि सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस सर्टिफिकेट को मानने से इनकार कर दिया है।

 

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में आया यह मामला

 

आपको बता दें कि इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अप्रैल में सुनवाई के लिए तैयार हो गया था। जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस हृषिकेश रॉय की बेंच ने आर्य प्रतिनिधि सभा को विशेष विवाह अधिनियम 1954 की धारा 5, 6, 7 और 8 के प्रावधानों को एक महीने के भीतर अपने दिशानिर्देशों में शामिल करने को कहा।

 

 

शेयर करे...

मुंबई। बरसात, ठंडी व गर्मी की बिना परवाह किए हमेशा पोस्टमैन लोगो को पत्र इत्यादि घर तक पहुँचाते है। ऐसे ही एक मेहनती व प्रतिभाशाली पोस्टमैन से ओवरसियर बने चंद्रकांत गंगाराम शिरसाट है।जो कि पिछले 40 वर्षों तक मालाड(वेस्ट) में जकरिया रोड पर स्थित मालाड डिलीवरी पोस्ट ऑफिस में काम किया और 31 मई 2022 को रिटायर हुए। इस अवसर पर मालाड डिलीवरी पोस्ट ऑफिस के सभी कर्मचारियों द्वारा एक भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया गया था ।

Chandrakant Shirsat retired after working 40 years in Malad Post Office 3

और पोस्ट ऑफिस को सजाया गया था व बेंजो पार्टी को बुलाया गया था। कार्यक्रम के दौरान पोस्टल पोस्टमास्टर संध्या झारापकर द्वारा ओवरसियर शिरसाट को शाल,नारियल व पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया और लोंगो ने गिफ्ट दिया।सभी पोस्ट ऑफिस के कर्मचारियों ने, नेशनल एसोसिएशन ऑफ पोस्टल एम्प्लाइज के व अन्य यूनियन के पदाधिकारियों ने अपने अपने विचार व्यक्त किये। पोस्टमैन और सभी कर्मचारी बहुत भावूक हो गए। एक साथ ख़ुशी और गम दोनों का माहौल बन गया।

Chandrakant Shirsat retired after working 40 years in Malad Post Office 2

  चंद्रकांत शिरसाट ने कहा," 40 साल तो बहुत अच्छे से गुजरा लेकिन उसके बाद के 6 महीने गुजारना काफी मुश्किल रहा। सबको छोड़ते हुए दुख तो हो रहा है लेकिन क्या कर सकते है? मैं सभी को साथ देने के लिए धन्यवाद देता हूँ।" 

Chandrakant Shirsat retired after working 40 years in Malad Post Office 1

           इस अवसर पर पोस्टऑफिस के व यूनियन के संतोष लाड,आर एन राहटे, संतोष पास्ते, वी डी नाईक, संजय कालोखे,सदानंद नाईक अपराज इत्यादि जैसे कई पोस्टमैन व पदाधिकारी उपस्थित रहे और कार्यक्रम में सफल बनाया।       

शेयर करे...

 

दिल्ली की लेखिका गीतांजलि श्री (Geetanjali Shree) के हिंदी उपन्यास 'टूंब ऑफ सैंड' को प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह किसी भी भारतीय भाषा की पहली पुस्तक है, जिसे यह सम्मान मिला है। गुरुवार (26 मई 2022) को लंदन में एक समारोह में Geetanjali Shree को यह सम्मान दिया गया। इस मौके पर Geetanjali Shree ने कहा कि वह सम्मान पाकर पूरी तरह अभिभूत हैं। 'मैंने कभी बुकर का सपना नहीं देखा था, मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं ऐसा कर सकती हूं। कितनी बड़ी पहचान है, मैं चकित, प्रसन्न, सम्मानित और विनम्र हूं।' पुरस्कार के साथ पदक चिह्न और 50,000 जीबीपी दिए जाते हैं। इस कितना बाद का अनुवाद डेजी रॉकवेल ने किया है।

 

स्टेज पर Geetanjali Shree के साथ डेजी रॉकवेल भी उपस्थित रहीं। अमेरिका के वरमोंट में रहने वालीं चित्रकार, लेखिका और अनुवादक रॉकवेल ने उपन्यास के अनुवाद को 'हिंदी भाषा के लिए प्रेम पत्र' के रूप में वर्णित किया। 'टूंब ऑफ सैंड' मूल रूप से 'रेट समाधि' पर आधारित है। यह उत्तरी भारत की 80 वर्षीय महिला की कहानी है। बुकर के लिए चुनाव करने वाले जजों ने इसे एक 'आनंददायक उपन्यास' करार दिया है।

 

तीन उपन्यासों और कई कहानी संग्रहों की लेखिका 64 वर्षीय गीतांजलि श्री ने अपनी किताबों का अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, सर्बियाई और कोरियाई में अनुवाद किया है। मूल रूप से 2018 में हिंदी में प्रकाशित, 'टूंब ऑफ सैंड' अगस्त 2021 में टिल्टेड एक्सिस प्रेस द्वारा यूके में अंग्रेजी में प्रकाशित होने वाली उनकी पहली पुस्तक है।

 

हिंदी की पहली कृति के लिए बुकर सम्मान हासिल करने पर लेखिका ने कहा कि ऐसा होने का माध्यम बनना अच्छा लगता है। लेकिन मेरे और इस पुस्तक के पीछे हिंदी और अन्य दक्षिण एशियाई भाषाओं में एक समृद्ध साहित्यिक परंपरा है। इन भाषाओं के कुछ बेहतरीन लेखकों को जानने के लिए विश्व साहित्य अधिक समृद्ध होगा। इस तरह की बातचीत से जीवन की शब्दावली बढ़ेगी।

शेयर करे...
Page 1 of 71
  • Samvad July 1
  • Samvad July 2 A
  • Samvad July 3 A

Magazine