बेटियों के गरीब बाप के लिए वरदान साबित हो रहा है लॉकडाऊन, कम बजट में हो रही शादियां Featured

रिपोर्टर-लोकनाथ पटेल

महासमुंद /सरकार भले ही लॉकडाऊन- 4 की घोषणा करके लोगों को कोविड-19 से लडऩे के लिए और मजबूती प्रदान कर रही है। पूरा देश सरकार के फैसले को मान भी रहा है और इस समय सामाजिक दूरी का पालन करना ही कोविड- 19 के बचाव का प्रमुख अस्त्र माना जा रहा है, लेकिन यह लॉकडाऊन गरीब परिवारों के बेटियों की होने वाली शादी के लिए वरदान साबित हो रही हैं।

शासन द्वारा सीमित लोगों के बीच शादी आयोजन की परमिशन दे रही है। जिसके चलते फिजूल खर्च एवं बेवजह होने वाले खर्च पर लगाम लग गया है सादगी से शादी समारोह हो रहें हैं जो गरीब तबकों के लिए शादी करना उनके बजट में हो रहा हैं। मेहमान को आमंत्रित नहीं करना पड़ रहा है साथ ही ज्यादा मेहमान नवाजी नहीं करनी पड़ रही है। बारातियों में भी सीमित लोग आ रहें है, कम मेहमान के बीच शादी कर रहें हैं। शासन बीस लोगों के बीच शादी समारोह का परमिशन दे रही हैं। सामान्य तौर पर शादी का खर्च बढ़ती महंगाई के चलते दिनों दिन बढता जा रहा था। हर वर्ष खर्च बढऩे से गरीब तबकों में शादी का खर्च उठाने के लिए बेटियों के पिता कर्जदार हो रहे थे। मेहमान के आवभगत खातिरदारी में खर्चा का कोई हिसाब नहीं रहता था। कम बजट में भी अगर शादी करते तो भी कम से कम एक लाख रूपये खर्च हो जाता था, जो अब लॉकडाऊन के चलते 10 से 20 हजार में हो रहा है। 

कम लोगों के आने से खर्च पर हो गया नियंत्रण

प्रत्येक शादी में एक लाख डेढ़ रुपए तक खर्च हो जाते हैं, लेकिन लॉकडाऊन के चलते शासन के नियम कायदे के कारण शादी समारोह शांतिपूर्ण एवं सीमित लोगों के बीच करने से खर्च पर नियंत्रण हो गया। शुरूआती लॉकडाऊन में पहले तो शासन ने कोई भी शादी समारोह एवं अन्य सभी भीड़भाड़ वाले कार्यक्रम को रद्द कर दिया था, लेकिन अब शासन-प्रशासन के कुछ नियमों के तहत ढील देते हुए 20 लोगों की उपस्थिति में शादी आयोजन की परमिशन दे रही हैं।

मार्च से जून तक शादी का सीजन है, लेकिन दो माह गुजर चुका है, मई और जून में शादी आयोजन होना है। बाहरी मेहमानों को ना बुलाते हुए घरवालों के बीच ही सीमित लोगों में शादी के सभी कार्यक्रम तेलमाटी, चुलमाटी, बारात स्वागत करना है। कोई बैंड-बाजा, लाईट, डेकोरेशन नहीं करना है। जिसकी वजह यह लॉकडाऊन गरीब परिवारों के लिए कम बजट में शादी करने का अवसर प्रदान कर रही है।

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Last modified on Thursday, 21 May 2020 13:51
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