प्रा.कृ.सा.समिति उडेला में किसानो का आरोप है कि बोरी भरने का लिया जा रहा है पैसा क्या यह उचित है यदि नही तो कारवाई क्यों नही हो रहा है जिम्मेदारों के उपर Featured

महासमुन्द जिले में बेपरवाह रहा शासन प्रशासन लाखों रुपये तौलाई गई जेब से किसानों के अधिक तौली गई किसानों की लाखों रुपए की धान सरकार किसानों की आय दो गुना करके उनके जीवन स्तर में सुधार का स्वप्न दिखाती है। वहीं प्रदेश में किसान पुत्र मुख्यमंत्री के औहदे पर बैठ किसान कल्याण का दम भरते हैं परंतु किसान कल्याण पर ग्रहण उनका सरकारी अमला ही लगाने में मशगूल है और मजबूर किसान बेवश आंशू बहा रहा है। सरकार ने बाजार की लूट से किसानों को बचाने के लिए समर्थन मूल्य पर धान खरीदने के लिए खरीदी केन्द्र बनाये और व्यवस्था दी की किसान अपनी धान खरीदी केन्द्र पहुँचाए बाकी का खर्च सरकार उठाएगी। इसके लिए सरकार द्वारा खरीदी केन्द्र समितियों को प्रति क्विटल 12 रुपए खर्च एवं कमीशन अलग से दिए। जिसमें तौलाई बोरी की सिलाई पल्लोदारी के साथ साथ किसानों के रुकने बैठने एवं पानी की व्यवस्था सामिल थी।
सरकार की आदेश रूपी चाक चौबंद व्यवस्था के बीच खरीदी केन्द्र उडेला में किसानों की दोहरी लूट की गई।एक तरफ दो रुपए प्रति बोरी तौलाई ली गईं तो दूसरी तरफ पाँच से छः सौ ग्राम प्रति बोरी धान ज्यादा तौलाई गई। किसान गुहार भी मारता रहा। परंतु किसान की लूट नहीं रुकी।किसानों की सुविधा के आदेश कागजों में कैद रहे।
अगर धान खरीदी केन्द्र उडेला पर गौर किया जाय तो 58 हजार क्विंटल रिकार्ड के अनुसार खरीदी हुई है। जिसके लिहाज से कुल 1 लाख 45 हजार बोरी धान खरीदी गई। जिसमें तौलाई के नाम पर किसानों से दो रुपए प्रति बोरी की दर से 2 लाख 90000 हजार रुपये लिए गए।
अगर किसानों से लिए गए मजदूरी एवं अधिक ली गईं धान की कीमत जोड़ी जाय तो करीब दस लाख से भी ज्यादा होगी ।खरीदी केन्द्र द्वारा बोरी की सिलाई एवं ट्रक लोड करने की पल्लेदारी खर्च की गई है।जबकि खरीदी खर्च के रूप में शासन द्वारा 12 रुपये प्रति क्विंटल दिये गये थे।
सबसे अहम यह रहा की जहाँ किसानों को दो रुपए प्रति बोरी तौलाई भरने को मजबूर किया गया वहीं बोरी का कृत्रिम अभाव दिखा कर किसानों को इतना मजबूर कर दिया गया की किसान अधिक धान की तौलाई का बिरोध न कर सकें।मजदूरी देने से आनाकानी न करे तथा बोरियों के लिए भी आरजू मिन्नत करे।अगर पूरे खरीदी केन्द्र की गतिविधियों पर गौर करें तो बोरियों के अभाव के नाटक और पीड़ित किसानों की किसी भी शिकायत पर प्रशासन का गौर न करना कई सवालों को जन्म देता है।
एक और अहम सवाल की जो धान किसानों का गला दबाकर अधिक तौली गई क्या वह नागरिक खाद्य आपूर्ति निगम के गोदाम को मिली, ऐसा संभव नहीं क्योंकि वजन कराकर ही गोदाम को दिया जाता है। फिर अधिक ली गई धान को कहाँ ठिकाने लगाया गया ।
अब सवाल उठता है की क्या उडेला खरीदी केन्द्र प्रभारी को शासन प्रशासन ने भ्रष्टाचार एवं किसानों की लूट की छूट दे रखी है , क्या इसी तरह किसानों का कल्याण जारी रहेगा, क्या जनप्रतिनिधि किसानों की समस्या से अपने को अलग कर चुके हैं ,क्या पीड़ित किसानों को न्याय मिल पायेगा।

वर्जन नरेश अध्यक्ष प्रा.कृ.सा.सहकारी समिति उडेला - हां मै भी एक किसान हूं मेरे से भी प्रति बोरी 2 रु. लिया गया है नियमानुसार कार्यवाही होनी चाहीए ।

वर्जन गणेश प्रसाद पटेल सदस्य प्रा.कृ.सा.सहकारी समिति उडेला - मेरे जानकारी में है लेकिन इनके उपर कोई कोई ठोस कार्यवाही नही होने से इनेके हौसले बुलंद है।

वर्जन जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव - आपके माध्यम से शिकायत संज्ञान में आया है।शिकायत की जांच कराकर नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी।

तो वहीं इस पूरे मामले में उप पंजीयक महासमुन्द से संपर्क नही हो पाया।

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Last modified on Thursday, 13 February 2020 05:02
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